नवप्रवर्तन का अर्थ नए विचारों, नवीन विधियों, उत्पादों, सेवाओं अथवा समाधानों को विकसित करने और अपनाने की ऐसी प्रक्रिया से है, जो सकारात्मक परिवर्तन एवं महत्वपूर्ण उपयोगिता प्रदान करे। इसमें रचनात्मक विचारों को व्यावहारिक रूप प्रदान किया जाता है, जिससे कार्यों की दक्षता, प्रभावशीलता और गुणवत्ता में सुधार हो तथा आवश्यकताओं की पूर्ति बेहतर ढंग से की जा सके।
नवप्रवर्तन के माध्यम से नवीन एवं रचनात्मक विचारों को उपयोगी समाधानों में परिवर्तित किया जाता है। इससे कार्यप्रणाली में सुधार, संसाधनों का बेहतर उपयोग, समस्याओं का प्रभावी समाधान तथा निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होती है।
विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में नवप्रवर्तन का उद्देश्य शिक्षण-अधिगम को अधिक रोचक, प्रभावी, रचनात्मक एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाना है। इसके अंतर्गत नवीन शिक्षण विधियों, गतिविधि-आधारित अधिगम, अनुभवात्मक शिक्षा, परियोजना कार्य, तकनीकी साधनों तथा स्थानीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जाता है।
नवप्रवर्तन विद्यार्थियों में रचनात्मक चिंतन, जिज्ञासा, तार्किक सोच, समस्या-समाधान, सहयोग और आत्मनिर्भरता जैसे महत्वपूर्ण कौशलों के विकास में सहायक होता है। इस प्रकार नवप्रवर्तन विद्यालय को निरंतर सीखने, सुधार करने और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित होने में सक्षम बनाता है।